June 5, 2026 5:37 AM

लखनऊ बना यूपी का पहला ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर, शिवरी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू

लखनऊ का यह कचरा प्रबंधन मॉडल सर्कुलर इकोनॉमी की मजबूत मिसाल है। इस तरह से लखनऊ नगर निगम की यह पहल देश-विदेश के अन्य शहरों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

लखनऊ: प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने कचरा प्रबंधन में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लखनऊ अब यूपी का पहला ऐसा शहर बन गया है जहां रोजाना निकलने वाला सारा कचरा वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस हो रहा है। नगर निगम का दावा है कि अब कोई ताजा कचरा खुले में नहीं फेंका जा रहा है। इसलिए लखनऊ को यूपी का पहला’जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर कहा जा रहा है।

लखनऊ की आबादी करीब 40 लाख की है और यहां 7.5 लाख से अधिक प्रतिष्ठान हैं। इस तरह यह तेजी से बढ़ता शहर है। ऐसे में कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन रहा था। इसे देखते हुए लखनऊ नगर निगम ने वैज्ञानिक कचरा निस्तारण, रिसोर्स रिकवरी और टिकाऊ शहरी विकास को केंद्र में रखकर बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इससे शहर की स्वच्छता, पर्यावरण और जनता के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।

इसी कड़ी में शिवरी में तीसरे फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन किया गया। इस प्लांट की क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। यहां पहले से दो प्लांट संचालित हो रहे थे। इस तरह अब नगर निगम के पास प्रतिदिन पैदा होने वाले 2,100 मीट्रिक टन से अधिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की पूरी क्षमता है। इससे खुले में कचरा डंप करने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। इस क्षमता के साथ लखनऊ यूपी का पहला ऐसा शहर बन गया है जहां शहरी सॉलिड वेस्‍ट की 100 फीसदी वैज्ञानिक तरीके से निस्‍तारण होता है।

लखनऊ में हर रोज लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। इसके प्रबंधन के लिए लखनऊ नगर निगम और भूमि ग्रीन एनर्जी ने 700-700 मीट्रिक टन क्षमता के तीन प्लांट स्थापित किए गए हैं। कचरे को जैविक (55 प्रतिशत) और अजैविक (45 प्रतिशत) हिस्सों में अलग किया जाता है। जैविक कचरे से खाद और बायोगैस बनाई जाती है। वहीं, अजैविक कचरे को रिसाइकल करके या फिर आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) में बदलकर सीमेंट और पेपर उद्योगों में इस्‍तेमाल किया जाता है।

12.86 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्‍तारण हो चुका

नगर निगम के अनुसार, शहर में मौजूद करीब 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने (लीगेसी) कचरे में से अब तक 12.86 लाख मीट्रिक टन का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा चुका है। इससे प्राप्त आरडीएफ, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (सीएंडडी) कचरा, बायो-सॉयल और मोटे अंशों का पर्यावरण के अनुकूल उपयोग किया गया है।

लगभग 2.27 लाख मीट्रिक टन आरडीएफ देश के विभिन्न उद्योगों को भेजा गया है। वहीं मोटा अंश, बायो-सॉयल और सीएंडडी कचरे का उपयोग निचले इलाकों के भराव और बुनियादी ढांचे के विकास में किया गया है।

इस प्रक्रिया से शिवरी साइट पर करीब 25 एकड़ भूमि को दोबारा उपयोग योग्य बनाया गया है। यहां अब 2,100 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाली आधुनिक फ्रेश वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधा विकसित की जा रही है, जिसमें विंडरो पैड, आंतरिक सड़कें, शेड, वे-ब्रिज और पूर्ण कचरा प्रबंधन ढांचा तैयार हो चुका है।

आगे की योजना के तहत लखनऊ नगर निगम शिवरी में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित 15 मेगावाट क्षमता का यह प्लांट हर रोज 1,000 से 1,200 मीट्रिक टन आरडीएफ से बिजली उत्पादन करेगा। इससे आरडीएफ को दूर-दराज स्थित सीमेंट फैक्ट्रियों तक ले जाने की लागत और दूरी दोनों कम होंगी।

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