Delhi Safdarjung Pradhanmantri Makbara: दिल्ली का सफदरजंग मकबरा मीरजा मुकीम अबुल मंसूर खान का है, जिसे शुजाउद्दौला ने 1753-1754 में बनवाया था. यह मुगलों की अंतिम इमारत मानी जाती है. बता दें कि इस मकबरे को बनाने के लिए हुमायूं के मकबरे से भी ईंटे निकलवाई गई थी.
नई दिल्ली : क्या आपने कभी किसी प्रधानमंत्री का मकबरा देखा है. वह प्रधानमंत्री, जिसकी वीरता और चतुराई की गाथा इतिहास के पन्नों पर मिलती है. यह प्रधानमंत्री मुगलों का प्रधानमंत्री था, जिसकी सलाह के बिना मुगल कोई भी काम नहीं करते थे. मुगल इसे प्रधानमंत्री कहने के साथ-साथ अपना वजीर भी कहते थे. यह मकबरा कोई और नहीं, बल्कि दिल्ली में स्थित सफदरजंग का मकबरा है. इसे भारत में मुगलों द्वारा स्थापित अंतिम इमारत भी कहते हैं. यह मकबरा 1753–1754 ई. के बीच बनवाया गया. इसे नवाब शुजाउद्दौला ने अपने पिता मिर्जा मुकीम अबुल मंसूर खान, जिन्हें सफदरजंग कहा जाता था. उनकी याद में बनवाया था. वही शुजाउद्दौला, जो अवध के तीसरा नवाब था. सफदरजंग की ही कब्र यहीं पर है. यह कब्र संगमरमर के बेहद चिकने और महंगे पत्थरों से बनाई गई है.
सफदरजंग किसका था प्रधानमंत्री
इतिहास में दर्ज जानकारी के मुताबिक सफदरजंग 18वीं शताब्दी का एक प्रमुख मुगल कालीन नवाब और सेनापति था. उसका पूरा नाम मीरजा मुकीम अबुल मंसूर खान था. वह अवध यानी लखनऊ का नवाब था. मुगल बादशाह अहमद शाह बहादुर के समय (1748–1754)वजीर-ए-आजम (प्रधानमंत्री) भी रहा था. इसीलिए सफदरजंग को आज भी प्रधानमंत्री के नाम से जाना जाता है और उसके मकबरे को भी प्रधानमंत्री मकबरा कहते हैं. इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं.