Satyam Kumar Success Story: बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर अमेरिका की टेक दुनिया तक पहुंचने वाले सत्यम कुमार की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है. मात्र 13 साल की उम्र में देश के सबसे युवा IITian बनने वाले सत्यम ने 24 की उम्र में पीएचडी पूरी की और आज अमेरिका में बतौर एआई रिसर्चर भविष्य की तकनीक गढ़ रहे हैं. जानिए उस ‘वंडर बॉय’ का सफर, जिसने साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती.
नई दिल्ली (Satyam Kumar Success Story). बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर अमेरिका की AI रिसर्च लैब तक का सफर तय करने वाले सत्यम कुमार की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. मात्र 12 साल की उम्र में पहली बार आईआईटी प्रवेश परीक्षा पास कर दुनिया को चौंका देने वाले सत्यम ने साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. आज जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पीछे भाग रही है, तब सत्यम अमेरिका में एआई रिसर्चर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं.
सत्यम कुमार ने 13 साल की उम्र में आईआईटी कानपुर में एडमिशन लेकर सबसे कम उम्र का IITian बनने का गौरव हासिल किया था. फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. सत्यम कुमार ने मात्र 24 साल की उम्र में टेक्सास यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की, जो अपने आप में विश्व रिकॉर्ड जैसा है. वर्तमान में वह सिलिकॉन वैली की तकनीकी दुनिया में एआई के भविष्य को आकार दे रहे हैं. पढ़िए बिहार के किसान के बेटे सत्यम कुमार की एआई जीनियस बनने की पूरी कहानी. इनकी सक्सेस स्टोरी किसी को भी मोटिवेट कर सकती है.
बिहार का लाल: 13 साल की उम्र में रचा इतिहास
सत्यम कुमार का जन्म बिहार के बक्सर जिले के बखोरापुर गांव में हुआ था. वह किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं. सत्यम की कुशाग्र बुद्धि ने बचपन में ही संकेत दे दिए थे कि वह असाधारण हैं. 2012 में सिर्फ 13 साल की उम्र में सत्यम कुमार ने ऑल इंडिया 670वीं रैंक हासिल कर आईआईटी कानपुर के बीटेक-एमटेक डुअल डिग्री कोर्स में एडमिशन लिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने साल 2011 में भी जेईई पास किया था, लेकिन तब रैंक हाई होने के कारण 2012 में दोबारा परीक्षा दी.