1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) पर VDA सेक्टर की निगाहें टिकी हैं। भारत में 15 करोड़ से अधिक क्रिप्टो निवेशक हैं.
नई दिल्ली। 1 फरवरी को यूनियन बजट 2026 पेश किए जाने की तैयारी चल रही है। बजट पर वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) सेक्टर की भी नजरें रहेंगी, क्योंकि भारत में क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वहीं दूसरी तरफ ग्लोबल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भी बदल रहे हैं। ऐसे में स्टेकहोल्डर्स का अनुमान है कि बजट 2026 (Union Budget 2026) भारत के डिजिटल एसेट इकोसिस्टम के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। मगर अभी ये अनुमान हैं, जिनमें क्रिप्टो स्टेकहोल्डर्स की कुछ डिमांड भी हैं।
क्या हैं क्रिप्टो स्टेकहोल्डर्स की उम्मीदें?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को बजट पेश करेंगी। क्रिप्टो इंडस्ट्री के लोगों को उम्मीद है कि इसमें क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल एसेट्स के लिए टैक्सेशन, रेगुलेशन और कंप्लायंस से जुड़ी चिंताओं को दूर किया जाएगा।
क्या हैं क्रिप्टो फर्म्स की डिमांड?
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार क्रिप्टो फर्म्स चाहती हैं कि बजट 2026 में 1% TDS और 30% VDA (वर्चुअल डिजिटल एसेट्स) टैक्स में ढील दी जाए ताकि ऑफशोर ट्रेडिंग को रोका जा सके
- छोटे निवेशकों की सुरक्षा के लिए TDS की सीमा बढ़ाकर ₹5 लाख किया जाए
- नुकसान को सेट-ऑफ करने और कैरी फॉर्वर्ड की अनुमति दी जाए
- फ्लैट 30% टैक्स रेट की समीक्षा हो और इसे दूसरी एसेट क्लास के साथ अलाइन किया जाए
- VDA टैक्सेशन को इनकम स्लैब या कैपिटल गेन प्रिंसिपल्स से लिंक किया जाए
अभी क्या हैं नियम?
- VDA के ट्रांसफर से होने वाली इनकम पर 30% फ्लैट टैक्स (प्लस सरचार्ज और सेस)
- एक्सपेंसेज या अलाउंसेज के लिए कोई कटौती नहीं
- VDA ट्रांजैक्शन से हुए नुकसान का कोई सेट-ऑफ या कैरी फॉरवर्ड नहीं
- VDA के गिफ्ट पर टैक्स रिसीव करने वाले को देना होगा
- VDA के ट्रांसफर के लिए दिए गए पेमेंट पर सेक्शन 194S के तहत 1% TDS
क्लैरिटी और फेयरनेस
वर्चुअल डिजिटल एसेट्स सेक्टर डीरेगुलेशन नहीं, बल्कि क्लैरिटी और फेयरनेस चाहता है। जानकारों का कहना है कि एक ट्रांसपेरेंट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और उचित टैक्स पॉलिसी से वीडीए सेक्टर में कम्प्लायंस बढ़ाने और एक सस्टेनेबल, ग्लोबल डिजिटल एसेट्स इकोसिस्टम बनाने में मदद मिल सकती है।
भारत में कितने क्रिप्टो इंवेस्टर्स हैं?
आज भारत में 15 करोड़ से अधिक क्रिप्टो यूजर्स होने का अनुमान है, जिससे भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते क्रिप्टो मार्केट में से एक बन गया है। इस ग्रोथ ने एक बड़ी डिजिटल एसेट इकॉनमी बनाई है, जिसमें एक्सचेंज, Web3 स्टार्टअप, ब्लॉकचेन डेवलपर्स और इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेंट्स शामिल हैं।