MPPSC Success Story: सफलता बलिदान मांगती है और बुंदेलखंड की मयंका चौरसिया ने इसे सच कर दिखाया. लगातार 8 बार MPPSC परीक्षा में असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार 9वें प्रयास में डीएसपी बन गईं. इस बीच उन्होंने शादी के लिए भी हामी नहीं भरी.
नई दिल्ली (MPPSC Success Story). सफलता की कहानियां तो बहुत होती हैं, लेकिन बुंदेलखंड की बेटी मयंका चौरसिया की कहानी ‘जिद’ और ‘जुनून’ का ऐसा अध्याय है, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा. क्या आप सोच सकते हैं कि कोई 8 बार लगातार असफल होने के बाद भी हार न माने? मयंका ने न केवल असफलता झेली, बल्कि समाज की सबसे बड़ी ‘अपेक्षा’ यानी शादी को भी तब तक के लिए टाल दिया जब तक कि उनकी वर्दी पर सितारे न लग जाएं. 8 बार की नाकामी और सालों का इंतजार.. लेकिन 9वीं बार में मयंका ने वो कर दिखाया, जिसने पूरे मध्य प्रदेश को चौंका दिया.
मयंका चौरसिया की सक्सेस स्टोरी केवल एक सरकारी नौकरी पाने की नहीं है, बल्कि यह कहानी है उस ‘भीष्म संकल्प’ की, जहां एक लड़की ने घर-परिवार और समाज के दबाव के आगे झुकने के बजाय अपने सपनों की खातिर खुद से एक कठिन वादा किया (Mayanka Chaurasia MPPSC). मयंका चौरसिया ने तय कर लिया था कि वे मंडप में तभी बैठेंगी, जब वे एमपीपीएससी परीक्षा पास कर सरकारी अफसर बन जाएंगी. आज छतरपुर की इस बेटी ने न केवल अपना वादा पूरा किया, बल्कि उन सभी के लिए मिसाल भी बन गई, जो किसी परीक्षा में एक-दो बार फेल होने के बाद टूट जाते हैं.
8 साल का ‘वनवास’ और नाकामियों का पहाड़
मयंका चौरसिया मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के कस्बे लवकुशनगर की रहने वाली हैं. उनका सफर किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा है. साल दर साल परीक्षा देना, इंटरव्यू तक पहुंचना और फिर चंद नंबरों से रह जाना- यह सिलसिला एक या दो बार नहीं बल्कि 8 बार चला. लोग बातें बनाने लगे थे, रिश्तेदार शादी का दबाव डालने लगे थे, लेकिन मयंका के सिर पर तो खाकी का जुनून सवार था. बुंदेलखंड के मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बेटी को इतने लंबे समय तक मौका देना भी बड़ी चुनौती थी, लेकिन मयंका की आंखों की चमक ने उनके माता-पिता को भी झुकने नहीं दिया.